चचेंडा के बीज

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Description

चिचिंडा (Snake Gourd) की बुवाई के लिए प्रति एकड़ 400 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है और इसकी बुवाई मुख्य रूप से साल में दो बार (वसंत-ग्रीष्म और वर्षा ऋतु) की जाती है। इसके बीज का आवरण (ऊपरी परत) काफी सख्त होता है, इसलिए अच्छे अंकुरण के लिए सही तरीके से बुवाई करना बेहद जरूरी है। 
चिचिंडा के बीजों की बुवाई (Sowing) की पूरी प्रक्रिया और विवरण नीचे दिया गया है:
1. बुवाई का सही समय
    • गर्मी का मौसम (वसंत-ग्रीष्म): जनवरी से अप्रैल के बीच इसकी बुवाई की जाती है। अगेती फसल के लिए उत्तर भारत में लोग इसे अप्रैल के महीने में खेतों में लगा देते हैं। 
    • बरसात का मौसम (वर्षा ऋतु): जून से जुलाई के महीने में इसकी बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान बेलों का विकास बहुत तेजी से होता है। 

2. बीजों का उपचार और अंकुरण (Seed Treatment)
    • पानी में भिगोना: चिचिंडा के बीज बहुत कड़े होते हैं। बुवाई से पहले बीजों को 12 से 24 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें। इससे बीज का आवरण नरम हो जाता है और अंकुरण तेजी से होता है। 
    • दवा से उपचार: बीजों को फफूंद (Fungus) जनित रोगों से बचाने के लिए कार्बेन्डाजिम (2 ग्राम प्रति किलो बीज) या ट्राइकोडर्मा विराइड (4 ग्राम प्रति किलो बीज) से अच्छी तरह उपचारित कर लें। 

3. बुवाई का तरीका और दूरी (Sowing Method & Spacing)
    • गड्ढा / थाला विधि: खेत में 50-60 सेमी व्यास और 30 सेमी गहरे गड्ढे तैयार करें। प्रत्येक गड्ढे में सड़ी हुई गोबर की खाद (FYM) और मिट्टी का मिश्रण भरें। 
    • बीज की संख्या: प्रत्येक गड्ढे में 3 से 4 बीज लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर की गहराई पर बोएं। जब पौधे बड़े हो जाएं (लगभग 15 दिन बाद), तो केवल 2 स्वस्थ पौधों को छोड़कर बाकी कमजोर पौधों को हटा दें। 
    • आपसी दूरी: लताओं को फैलने के लिए पर्याप्त जगह चाहिए। इसलिए दो कतारों (पंक्तियों) के बीच की दूरी 7 से 8 फीट और पौधों (गड्ढों) के बीच की दूरी लगभग 3 से 4 फीट (1 मीटर) होनी चाहिए। 

4. मचान या पंडाल विधि (Trellis System)
    • चिचिंडा एक तेजी से बढ़ने वाली बेल वाली फसल है। बुवाई के ठीक 1 महीने बाद जब बेल बढ़ने लगे, तो बांस, प्लास्टिक की रस्सी या लोहे के तारों का इस्तेमाल करके मचान (पंडाल) जरूर बनाएं। 
    • लताओं को मचान पर चढ़ाने से फल सीधे और लंबे लटकते हैं, जिससे वे मिट्टी के संपर्क में आकर सड़ते नहीं हैं और बाजार में उनका बहुत अच्छा भाव मिलता है。

Additional information

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250 gram, 500 gram

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