Barnyard Millets

बार्नयार्ड मिलेट (Barnyard Millet) को हिंदी में मुख्य रूप से “सांवा”, “सामा”, “सामक” या “झंगोरा” कहा जाता है। यह एक प्राचीन, ग्लूटेन-मुक्त (gluten-free) और बेहद पौष्टिक मोटा अनाज (Millet) है। व्रत या उपवास के दिनों में खाया जाने वाला “सामक के चावल” असल में इसी मिलेट का रूप है। 
सांवा (बार्नयार्ड मिलेट) का परिचय
  • वैज्ञानिक नाम: इसका वानस्पतिक नाम इचिनोक्लोआ फ्रुमेंटेसिया (Echinochloa frumentacea) है。 
  • दिखावट: इसके दाने बहुत छोटे, गोल और हल्के मटमैले या सफेद रंग के होते हैं。 
  • खेती: भारत में मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारतीय राज्यों में इसकी पैदावार होती है。 यह फसल बहुत कम पानी और खराब मौसम में भी आसानी से उग जाती है। 
प्रमुख स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits)
  • पाचन के लिए वरदान: इसमें सभी मिलेट्स की तुलना में सबसे अधिक फाइबर (लगभग 15-16% प्रति 100 ग्राम) होता है। यह कब्ज (constipation) और गैस जैसी पेट की समस्याओं को दूर करता है
  • डायबिटीज नियंत्रण: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत कम होता है। यह खून में ग्लूकोज को धीरे-धीरे रिलीज करता है, जिससे शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता。 
  • वजन घटाने में मददगार: हाई फाइबर और लो कैलोरी होने के कारण इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती, जिससे वजन नियंत्रित रहता है। 
  • ग्लूटेन-मुक्त (Gluten-Free): जो लोग ग्लूटेन एलर्जी या सीलिएक रोग से पीड़ित हैं, उनके लिए यह गेहूं का एक बेहतरीन विकल्प है। 
  • पोषक तत्वों से भरपूर: इसमें भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और मैग्नीशियम पाया जाता है, जो हड्डियों और दिल की सेहत के लिए अच्छा है। 
रसोई में उपयोग (Culinary Uses)
इसका स्वाद हल्का मीठा और अखरोट (nutty) जैसा होता है। इसे पकाना बहुत आसान है और इसके कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं: 
  • सामक की खिचड़ी या पुलाव (विशेषकर नवरात्रि और अन्य व्रतों में)
  • सांवा की खीर या दलिया
  • इसके आटे से बने डोसा, इडली, रोटी और पूरियां

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