आटा

 

रागी का आटा (फिंगर मिलेट का आटा): गहरे लाल-भूरे रंग का यह आटा कैल्शियम और आयरन से भरपूर होता है। हड्डियों के स्वास्थ्य और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इसकी अत्यधिक अनुशंसा की जाती है। बाजरा का आटा (पर्ल मिलेट का आटा): सर्दियों में पारंपरिक रूप से सेवन किया जाने वाला यह गर्म और गाढ़ा आटा है। यह मैग्नीशियम और पोटेशियम से भरपूर होता है, जो शरीर को गर्म रखता है और हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। ज्वार का आटा (सोरघम का आटा): हल्का, मलाईदार-सफेद आटा जो आसानी से पच जाता है और प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। इससे उत्कृष्ट ग्लूटेन-मुक्त फ्लैटब्रेड (भाकरी) बनती है। 3. विशेष और वैकल्पिक आटा: चना का आटा / बेसन (ग्राम फ्लोर): पिसी हुई चना दाल (फटी हुई बंगाली चना) से बनाया जाता है। यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, प्रोटीन से भरपूर होता है और इसका उपयोग बाइंडिंग, तलने और नमकीन स्नैक्स बनाने के लिए किया जाता है। मक्की का आटा (मक्का / पीला मक्का का आटा): सूखे पीले मक्के के दानों से बनाया जाता है। यह उत्तरी भारत में सर्दियों का पसंदीदा व्यंजन है, जिसे परंपरागत रूप से सरसों के साग के साथ परोसा जाता है। कुट्टू आटा (बकव्हीट आटा) और सिंघाड़ा आटा (वॉटर चेस्टनट आटा): ये पोषक तत्वों से भरपूर, ग्लूटेन-मुक्त छद्म-अनाज के आटे हैं, जिनका सेवन आमतौर पर धार्मिक व्रतों (नवरात्रि व्रत) के दौरान किया जाता है।

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